• सुप्रीम कोर्ट अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे पर फिर विचार कर रहा है। कोर्ट इस मौलिक अधिकार को निष्पक्ष ट्रायल के मौलिक अधिकार से तुलना कर जांचे-परखेगा। ये देखा जाएगा कि बोलने की आजादी किस हद तक है? इसमें सरकारी पदों पर बैठे लोगों की दुष्कर्म जैसे अपराध के बारे में बयानबाजी भी विचार के दायरे में होगी। • मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए सपा नेता आजम खां द्वारा बुलंदशहर सामूहिक दुष्कर्म कांड पर टिप्पणी का मसला जब कोर्ट के सामने आया था तो कोर्ट ने इस कानूनी पहलू पर विस्तृत सुनवाई का मन बनाकर चार कानूनी प्रश्न तय कर दिए थे। बुधवार को यह मामला जब सुनवाई पर आया तो कोर्ट की मदद कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरीमन ने कहा, ‘कोर्ट को देखना होगा कि इस मामले में कहां तक जा सकते हैं। • संविधान के अनुछेद 19 (1)(ए) (अभिव्यक्ति की आजादी) और इस आजादी पर तर्कसंगत पाबंदियों 19(2) पर विचार करते समय काफी सावधान रहना होगा।’ उनका कहना था कि संविधान में इस तरह की टिप्पणियों पर रोक नहीं है। इस पर कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी पर संविधान में दी गई पाबंदियों का जिक्र किया जिसमें कानून व्यव...