गुजरात सरकार ने अहमदाबाद के निकट सानंद में नैनो प्लांट लगाने के लिए 558.58 करोड़ रुपए का कर्ज दिया। उसने माना कि इतना बड़ा लोन मात्र 0.1 फीसदी ब्याज पर दिया गया, जो 20 वर्षों में लौटाना है। दूसरे शब्दों में इतना बड़ा कर्ज लगभग ब्याजमुक्त ही कहा जाएगा और चूंकि यह 20 वर्षों में चुकाना है, तो यह ब्याज मुक्त दीर्घावधि लोन ही है। एक और मामला लीजिए। खबरों के मुताबिक स्टील उत्पादक लक्ष्मी नारायण मित्तल को पंजाब सरकार ने बठिंडा रिफाइनरी में निवेश के लिए 1,200 करोड़ रुपए का लोन दिया। उन्हें भी 0.1 फीसदी की ब्याज दर पर ऋण दिया गया। दूसरी तरफ, गांव में निर्धनतम महिला बकरी खरीदना चाहती है, जिसकी कीमत 5,000 रुपए के करीब होगी। वह किसी माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (एमएफआई) जाती है, जो उसे 24 से 36 फीसदी अथवा और भी ऊंचे दर पर 5,000 का लोन देता है। यह मामूली-सा लोन हर सप्ताह चुकाना है। आप भी मानेंगे कि यदि इस गरीब महिला को बकरी पालने के लिए यह लोन 0.1 फीसदी की दर से टाटा की तरह 20 साल सही, पांच साल के लिए ही दिया जाता तो साल के अंत में वह नैनो कार में घूमती नज़र आती। यह गरीब महिला भी आंत्रप्रेन्योर ...