एंटीबायोटिक पूरी तरह से बेअसर होने का खतरा (निकोलस बागले और केविन उटर्सन, एंटी बायोटिक पर शोध करने वाले विशेषज्ञ) अमेरिकाकेसेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल एवं प्रीवेन्शन ने हाल ही में परेशान करने वाली रिपोर्ट जारी की है। उसमें बताया गया है कि नेवाडा राज्य में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई। उन्हें तो हृदय रोग था, कैंसर न्यूमोनिया। क्या उनकी जान उन बैक्टीरिया के कारण गई, जिनकी रोकथाम के लिए डॉक्टर उन्हें एंटीबायोटिक देेते थे। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट बैक्टीरिया के खिलाफ युद्ध का शिकार बनी वह वृद्ध महिला हाल के वर्षों में पहला उदाहरण है। जहां तक युद्ध की बात है, उसमें हम सभी हार रहे हैं। हालांकि, एंटीबायोटिक से सामना होते ही अधिकतम बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, बहुत मजबूत वाले बग्स ही बचते हैं। बार-बार एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से ऐसे बैक्टीरिया का जन्म होता है। उनकी आबादी बढ़ते ही वे रेजिस्टेंस जीन में प्रवेश करने लगते हैं। एंटीबायोटिक का यही अभिशाप है कि जितना ज्यादा उसका उपयोग किया जाता है, हालत उतनी खराब होने लगती है। ऐसा तब होता है, जब लापरवाहीपूर्वक उसका उपयोग किया जाता है...