Skip to main content

महाभियोग का मकसद


महाभियोग एक लंबी एवं जटिल प्रक्रिया है और अभी तक का अनुभव यही बताता है कि इस प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाना खासा मुश्किल होता है।
मुख्य संपादकीय

जज बीएच लोया की मौत के मामले में मनमाफिक फैसला न आने के तत्काल बाद कांग्रेस और कुछ अन्य दलों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र के खिलाफ महाभियोग लाने की जैसी हड़बड़ी दिखाई और राज्यसभा के सभापति को इस आशय का प्रस्ताव भी सौंप दिया उससे उसकी खिसियाहट ही प्रकट हो रही है। देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब संकीर्ण राजनीतिक कारणों से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लाने की पहल की गई है। यह राजनीति के गिरते स्तर का नया प्रमाण है।

कांग्रेस एक बेहद खराब परंपरा की शुरुआत कर रही है। इससे उसे अपयश के सिवाय और कुछ हासिल होने वाला नहीं है, यह महाभियोग प्रस्ताव पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हस्ताक्षर न करने से भी स्पष्ट है। सलमान खुर्शीद एवं कुछ अन्य कांग्रेसी नेता भी इस प्रस्ताव से असहमत हैं। सलमान खुर्शीद ने यह कहकर एक तरह से कांग्रेस की पोल ही खोली है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय या नजरिये से असहमति के आधार पर महाभियोग नहीं लाया जा सकता। इसके बाद भी नेता एवं वकील की दोहरी भूमिका में सक्रिय रहने वाले राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल महाभियोग प्रस्ताव को सही ठहराने में लगे हुए हैं। उनका साथ अन्य अनेक कांग्रेसी नेता भी दे रहे हैं। कहना कठिन है कि महाभियोग की पैरवी कर रहे ये कांग्रेसी नेता सचमुच राहुल गांधी के शुभचिंतक हैं, क्योंकि महाभियोग संबंधी प्रस्ताव की भाषा भले ही कुछ और हो वह यही बता रही है कि वांछित निर्णय न आने पर ही मुख्य न्यायाधीश को निशाने पर लिया जा रहा है। यह कीचड़ फेंक कर भाग निकलने वाला रवैया है। कांग्रेस को यह रवैया बहुत महंगा पड़ेगा, क्योंकि वह राजनीतिक लड़ाई को एक नए, किंतु निम्न स्तर पर ले जा रही है।

महाभियोग एक लंबी एवं जटिल प्रक्रिया है और अभी तक का अनुभव यही बताता है कि इस प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाना खासा मुश्किल होता है। अगर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की नोटिस स्वीकार भी हो जाती है तो भी उसके पारित होने के आसार नहीं, क्योंकि एक तो कांग्रेस महज छह-सात दल ही अपने साथ खड़ी कर सकी है और दूसरे, केवल राज्यसभा में ही प्रस्ताव पारित होना पर्याप्त नहीं। यह प्रस्ताव दोनों सदनों से पारित होना चाहिए और इसके आसार दूर-दूर तक नहीं। कांग्रेस इस प्रस्ताव के हश्र से अनभिज्ञ नहीं हो सकती, लेकिन यदि वह सब कुछ जानते हुए भी आगे बढ़ रही है तो इसका मतलब यही है कि उसका एक मात्र मकसद यह माहौल बनाना है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के इशारे पर चल रहा है। यह एक संवैधानिक संस्था की छवि को जानबूझकर मलिन करने की शरारत भरी कोशिश के अलावा और कुछ नहीं। ऐसा लगता है कि कांग्रेस संस्थाओं को नष्ट करने और उनकी छवि खराब करने की अपनी पुरानी प्रवृत्ति का परित्याग नहीं कर पा रही है। वह महाभियोग प्रस्ताव के जरिये एक तरह से न्यायपालिका को यही संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अगर फैसले उसके हिसाब से नहीं आए तो वह उसकी पगड़ी उछालने का काम कर सकती है।

Comments

Popular posts from this blog

ब्रेग्जिट की प्रक्रिया शुरू :ब्रिटिश राजदूत ने पीएम थेरेजा का पत्र ईयू अध्यक्ष को सौंपा

• यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की प्रक्रि या औपचारिक रूप से शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री थेरेजा मे ने कहा कि इस मुद्दे पर पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है।हाउस ऑफ कॉमंस में दिए अपने बयान में थेरेजा ने कहा, ब्रिटिश राजदूत सर टिम बैरो ने ब्रसेल्स में यूरोपीय परिषद के प्रमुख डोनाल्ड टस्क को ब्रेग्जिट के संदर्भ में उनका पत्र सौंप दिया है।  • उन्होंने कहा, सरकार ब्रिटिश जनता की लोकतांत्रिक इच्छा के आधार पर काम करती है और यह सदन के स्पष्ट और स्वीकार्य रुख के आधार पर भी कदम उठाती है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा, अनुच्छेद 50 की प्रक्रि या अब चल रही है और ब्रिटिश जनता की भावनाओं के अनुसार ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो रहा है। यह एक ऐतिहासिक मौका करार दिया जिससे पीछे नहीं हटा जा सकता।  • उन्होंने कहा, अब समय वह है कि हम साथ आएं और एकजुट हो जाएं। यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर जाने को लेकर दो वर्षीय वार्ता प्रक्रि या शुरू करने की देश की मंशा के बारे में ईयू को अधिसूचित करने के लिए बीती रात 10 डाउनिंग स्ट्रीट पर एक पत्र पर हस्ताक्षर किया गया।  • इस पत्र में यूरोपी...

भारत_बांग्लादेश_अहम_समझौते_2017

दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र सहित 22 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।  - कोलकाता और खुलना के बीच बस व ट्रेन संबंध बहाल - पांच अरब डॉलर की वित्तीय मदद देने का फैसला - तीस्ता जल बंटवारे संधि पर जल्द अंतिम फैसले का आश्वासन अहम समझौते - पांच साल का रक्षा सहयोग फ्रेमवर्क बना - रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए 50 करोड़ डॉलर का कर्ज - बांग्लादेश में परियोजनाओं के लिए 4.5 अरब डॉलर की मदद - बांग्लादेश के सैनिकों को मिलेगा भारत में बेहतर प्रशिक्षण - बांग्लादेश में परमाणु ऊर्जा प्लांट लगाने में मदद करेगा भारत - सड़क, रेल व जल मार्ग से और तेजी से जुड़ेंगे दोनों देश वैसे बांग्लादेश सरकार की बहुत चाहत के बावजूद तीस्ता जल बंटवारे पर समझौता नहीं हो सका।  - भारत से बांग्लादेश को एकमुश्त पांच अरब डॉलर की वित्तीय मदद मिली है। इनमें से 4.5 अरब डॉलर भारत बांग्लादेश में विभिन्न परियोजनाओं को पूरा करने में देगा। 50 करोड़ डॉलर की मदद भारत से जरूरी रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए दी जाएगी। - इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों में नई दिल्ली की तरफ से ढाक...

देश का पहला कार्बन न्यूट्रल जिला होगा माजुली द्वीप

मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने पर्यावरण के प्रति आम लोगों से जागरुक होने की अपील की है। मुख्यमंत्री सोनोवाल के मुताबिक हर किसी को प्रकृति का संरक्षण करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर 22 मार्च 2017 को आयोजित ‘माजुली में जलवायु अनुरूप विकास के लिए सतत कार्रवाई’ अभियान के शुरुआत के दौरान मुख्यमंत्री ने उक्त बात कही। इस अभियान के तहत देश की एकमात्र द्वीप जिला माजुली को देश का पहला कार्बन न्यूट्रल जिला बनाए जाने की योजना है। अंतरराष्ट्रीय वानिकी दिवस के अवसर पर यहां आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सोनोवाल ने कहा कि राज्य में स्थित देश का एकमात्र द्वीप जिला माजुली इन दिनों अपने अस्तित्व संकट का सामना कर रहा है। इसको देखते हुए ही राज्य सरकार ही उक्त अभियान की शुरुआत की है, ताकि माजुली को देश का पहला कार्बन न्यूट्रल जिला सहित एक जैवविविधता विरासत के रूप में विकसित किया जा सके। सभी लोगों को चाहिए कि इस जैवविविधता विरासत स्थल को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए आवश्यक संकल्प ले। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए राज्य सरकार अप्रैल माह के अंत में...

ads1