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मंत्र


अहकूटा भयत्रस्तैः
कृता त्वं होलि बालिशैः ।
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्‌ ॥ 


- अधर्म कितना भी शक्तिशाली और मायावी क्यों न हो, धर्म-सत्य को जलाने में खुद जल जाता है..!! यही अधर्म  की नियति और दुर्गति है ।


।। राम राम ।। 


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