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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013

जो राष्ट्रीय खाद सुरक्षा अधिनियम है वह 2013 में शुरू किया गया था क्योंकि देश में बहुत सारे लोग ऐसे गरीब थे जिनके पास भोजन नहीं था खाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी और उनका स्वास्थ्य बहुत कुपोषित से कुपोषण से शिकार थे इसलिए भारत सरकार ने उस समय राष्ट्रीय खाद सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी देश के नागरिकों को जो गरीब हैं उन सभी को सस्ते में अनाज ₹1 दो रुपया ₹3 किलो अनाज से लोगों को उपलब्ध कराया

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम इसके द्वारा जनता के लिए पोषक खाद्य और पोषक सुरक्षा पोषण सुरक्षा की जा रही है

खाद्य सुरक्षा विधेयक का मुख्य उद्देश्य गरीब से गरीब व्यक्ति महिलाओं और बच्चों की खाद्य सुरक्षा संबंधित जरूरतों को पूरा करना है जिससे कि उन्हें भोजन के लिए कोई समस्या ना हो उनको पर्याप्त मात्रा में अनाज उपलब्ध हो सके इसके लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा खाद्य सुरक्षा अधिनियम है 2013 उसे लाया गया था

इस विधेयक में शिकायत निवारण तंत्र की भी व्यवस्था है अगर कोई जनसेवा किया अधिकृत व्यक्ति इसका अनुपालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ शिकायत कर सुनवाई का प्रावधान भी किया गया है जिससे कि गरीब लोगों को कोई समस्या ना हो और उन्हें जो उनके खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जो अनाज दिया जा रहा है वह उन तक पहुंच सके और इसमें गड़बड़ी होने पर इसकी शिकायत आने पर इसमें सुनवाई भी की जाती है और इसका निवारण भी किया जाता है

राष्ट्रीय खाद सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत गरीबों को ₹2 किलो गेहूं और ₹3 प्रति किलो चावल देने की व्यवस्था की गई है इस कानून के तहत व्यवस्था है कि लाभार्थियों को उनके लिए निर्धारित खाद्यान्न हर साल में हर हाल में मिले इसके लिए खाद्यान्न की आपूर्ति होने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा भत्ते के भुगतान के नियम की नियम को जनवरी 2015 में लागू किया गया जिसे जब उन्हें खाद्य ना मिल पाए तो उसके लिए उन्हें दत्ता मिल सके और उन्हें किसी प्रकार की समस्या ना आए क्योंकि यदि इसमें अनाज उपलब्ध नहीं हो पाता है तो उन लोगों के लिए एक समस्या उत्पन्न हो जाती जो लोग इस पर आश्रित हैं इसलिए यह अधिनियम लाया गया है यदि अनाज नहीं उपलब्ध हो पाता है तो उनके लिए सरकार को देना होगा भट्टा सरकार को देना होगा

समाज के अति निर्धन वर्ग के हर परिवार को हर महीने अंत्योदय अन्न योजना में इस कानून के तहत सब्सिडी दरों पर यानी ₹3 दो रुपए 1 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से चावल गेहूं और मोटे अनाज मिल रहे हैं इतनी कम कीमत पर देने का उद्देश्य है कि देश के सभी गरीब लोगों को अनाज उपलब्ध हो सके और वह उसे खरीद सके क्योंकि गरीब लोगों के पास धन की समस्याएं तभी हो गरीब है इसीलिए उन्हें अनाज खरीदने में कोई दिक्कत ना है और उनकी समस्याओं का समाधान हो सके इसलिए इतने सस्ते दर पर अनाज दिए जा रहे हैं

पूरे देश में इस कानून के लागू होने के बाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के बाद 81.34 करोड लोगों को ₹2 प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं और ₹3 प्रति किलोग्राम की दर से चावल दिया जा रहा है इससे लाभान्वित होने वाले लोगों की संख्या लगभग 81.34 करोड़ है जो देश की एक बहुत बड़ी संख्या है क्योंकि देश में सवा करोड़ के आसपास लोगों की जनसंख्या है जिसमें से 81.34 करोड लोगों को इस योजना के द्वारा लाभ मिल रहा है देश में 25 करोड़ परिवार है लगभग और देश की जनसंख्या 130 करोड़ के आसपास है इसमें से 81.34 करोड लोगों को यह सुविधा मिल रही है तो यह बहुत बड़ी योजना है और भारत सरकार के लिए गरीबों के लिए चलाया गया एक अच्छा कदम है

गरीबों को इस योजना का फायदा मिल सके इसलिए भारत सरकार ने एक राष्ट्र और एक राशन कार्ड की योजना को लेकर आ रही है जो 2020 तक पूर्ण हो जाएगी और कोई भी लाभार्थी पूरे देश में किसी भी सरकारी दुकान से इस योजना का फायदा उठा सकता है जिससे वह यदि राज्य के बाहर कोई काम करने जा रहा है तो वह वहां भी इसका लाभ उठा सकेगा उसे वापस आकर यहां पर अनाज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी जोकि बहुत अच्छा कदम है

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