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रूस के तीन दिवसीय दौरे पर जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी


एक जून से रूस के तीन दिवसीय दौरे पर जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी : भारत-रूस संबंधों में पुरानी गर्माहट लाने की कोशिश


• क्या रूस दशकों पुराने अपने मित्र भारत की शर्त पर चीन व पाकिस्तान के साथ रिश्तों को आगे बढ़ाना जारी रखेगा? कूटनीति में इस तरह के सवालों का जवाब मिलने में थोड़ा वक्त लगता है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी की आगामी रूस यात्र के बाद इसका जवाब तलाशा जा सकता है। मोदी एक जून से तीन जून तक रूस की यात्र पर होंगे जहां वह दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरा होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। 

• पिछले वर्ष जब से रूस ने पाकिस्तान के साथ सैन्य अभ्यास करने पर भारत की आपत्तियों को नजरअंदाज किया था तभी से मोदी सरकार रूस के साथ कूटनीतिक रिश्तों में नई गर्मजोशी लाने की कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार ने रूस के साथ हथियार खरीदने के लंबित प्रस्तावों को न सिर्फ तेजी से मंजूरी दी बल्कि द्विपक्षीय आर्थिक कारोबार को बढ़ाने का नया प्रस्ताव भी तुरंत तैयार कर लिया। 

• रूस की तरफ से भी संतोषप्रद प्रतिक्रिया मिली है। केंद्र सरकार नजाकत को समझ रही है तभी हर मंत्रलय को अपने स्तर पर रूस के साथ लंबित मामलों पर तेजी से फैसला करने को कहा गया है। 

• हकीकत बनेगी गैस पाइपलाइन :पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि भारत सरकार जिन देशों के साथ गैस पाइपलाइन पर बात कर रही है उसमें सिर्फ रूस के साथ ही सकारात्मक दिशा में बात आगे बढ़ी है। 

• हाल ही में दोनों देशों ने अपनी तैयारियों का एक दूसरे से आदान-प्रदान किया है। इस परियोजना पर पिछले वर्ष गोवा में ब्रिक्स बैठक के दौरान बातचीत हुई थी। 

• पेट्रोलियम मंत्रलय के अधिकारी बताते हैं कि पिछले छह महीने के दौरान जो प्रगति हुई है उससे साफ है कि यह परियोजना संभव है। जल्द होने वाली मोदी व पुतिन की शीर्ष बैठक में इस मामले को और आगे ले जाने का रास्ता निकलने की उम्मीद है।

• भारत अब द्विपक्षीय रिश्तों को सिर्फ रक्षा तक ही सीमित नहीं रखना चाहता है बल्कि उसे व्यापक आयाम देना चाहता है। भारत द्विपक्षीय कारोबार को तेजी से बढा़ने का प्रस्ताव कर रहा है जिस पर मोदी की रूस में बातचीत होगी। 

• हाल ही में भारत व रूस ने इसके लिए एक अरब डॉलर का विशेष फंड बनाने का फैसला किया है। भारतीय रणनीतिकार रूस के साथ मौजूदा 10 अरब डॉलर के द्विपक्षीय कारोबार को 10 वर्षो में 30 अरब डॉलर करने का खाका तैयार कर रहे हैं। 


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